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Short stories for kids in hindi

Short stories for kids in hindi की इस वेबसाइट पर हम बच्चो के लिए hindi लेके आते मजेदार kahaniya और रोचक किस्से ,stories मदद करती बच्चो kids की पड़ने की आदत बनाने मे ,और साथ साथ हर कहानी में होता है  hindi moral ,जिससे बच्चो को सीख मिलती है। Hindi Stories for Kids की हर Hindi Story New होती है , कही से भी कॉपी नहीं की जाती।

Story In Hindi For Child| हिंदी कहानियां

Short stories for kids in hindi                                                                              Short stories for kids in hindi

Hindi Stories for Kids लेके आयी है कुछ interesting stories जिससे बच्चो को काफी कुछ सिखने को मिलेगा ,साथ में हम कठिन शब्द का मतलब भी समझायेंगे।

 

1. ये पढ़ाई किसी काम की नहीं ( This Study Is Of NO Use )

एक गांव में जेठालाल नाम का एक बच्चा रहता था ,वो 8th क्लास में पड़ता था, जेठालाल पढ़ाई में इतना होशियार नहीं था पर वो हमेसा मेहनत करता ताकि वो पढ़ाई में अच्छा कर सके।

एक बार की बात है ,जेठालाल अपने स्कूल से घर जा रहा था ,रास्ते में उसने एक भिखारी (beggar) को देखा वो सबसे भीख मांग रहा था ,” अल्लाह के नाम पे देदे बाबा “,पर जब वहाँ से विदेशी निकले तो भिखारी ने उनसे इंग्लिश में बात की ,यह देखके जेठालाल हैरान हो गया।

वह भिखारी के पास गया और उनसे पुछा की वह इतना पड़ा लिखा होके भी भीख क्यों मांग रहे है ,भिखारी ने कहा ” ये पढ़ाई किसी काम की नहीं है सब किस्मत का खेल है “,यह सुनने के बाद जेठालाल वहा से चला गया।

घर जाके जेठालाल गुस्से में बोला ” मुझे अब नहीं पड़ना , क्यूंकि अगर किस्मत ख़राब है तो वैसे भी मुझे भीख ही मांगनी पड़ेगी “,ये सुनते ही पिताजी ने सोचा की जेठालाल को पढ़ाई का महत्व (Importance) बताना पड़ेगा ,पिताजी ने एक हल (Solution) निकला।

पिताजी की सीख…

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अगले दिन जेठालाल ने पिताजी से चॉकलेट के लिए 10 रुपए मांगे ,पिताजी ने उसे 5 रुपए का नोट दिया ,जेठालाल ने कहा “यह तो 5 रुपए है”,पिताजी ने कहा ” अगर तुम गणित (Maths) नहीं पढ़ते तो यह नहीं जान पाते कि ये कितने रुपए है और ऐसे अगर तुम अंग्रेजी (English) नहीं पढ़ते तो चॉकलेट को मौकलेट कहते।

पिताजी ने कहा ” छोटी से बड़ी हर जगह में पढ़ाई का इस्तेमाल होता है ,सिर्फ किस्मत के भरोसे बैठने से कुछ नहीं होता “, ये बात जेठालाल के मन में घर कर गयी ,उसे अपनी गलती का एहसास हुआ और उसने पढ़ाई में और मेहनत की।

Hindi Stories for Kids Moral (सीख ) :— जीवन में पढ़ाई बहुत जरुरी है ,और किस्मत भी उनका साथ देती है जो मेहनत करते है।

Hindi Stories for Kids New Words (नए शब्द) :— 1. घर कर गयी ( मुहावरा ) — किसी बात को बहुत पसंद करना।

2. सच्चा मित्र (True Friend )

एक बार की बात है , रमन और सुनील नाम के दो दोस्त एक साथ गांव में रहते थे ,वे दोनों बहुत पक्के दोस्त थे ,एक साथ स्कूल जाते थे ,एक साथ खेलते थे और एक साथ ही खाना खाया करते थे।

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दोनों दोस्त एक दूसरे से थोड़ा अलग भी थे ,एक तरफ रमन एक बहुत अच्छा होनहार( excellent ) पड़ने वाला बच्चा था वही सुनील पढ़ाई में कमजोर था ,पर रमन को इस बात का कोई घमंड नहीं था वो सुनील की पढ़ाई में हमेशा मदद करता था . रमन का मदद करने का अंदाज़ कुछ अलग था ,वो न तो कभी सुनील का ग्रहकार्य (homework) करता और न ही उसको किसी चीज़ के उत्तर (Answer) कि नक़ल (cheating) कराता ,वो सिर्फ उसको अपने आप ही सवाल को हल (solve) करना सिखाता।

स्कूल में परीक्षा (exam) आने वाली थी एक तरफ रमन पढ़ाई लगा था तो दूसरी और सुनील को कोई परवा नहीं थी , परीक्षा पास में आ गयी तो सुनील ने रमन को परीक्षा में नक़ल करने को कहा पर रमन ने मना कर दिया इस बात से सुनील रमन से गुस्सा को आया गया और वो रमन से अलग हो गया ,रमन ने उसको समझाया पर सुनील नहीं माना।

फिर सुनील ने क्या किया? ……

सुनील ने गुस्से में यह ठान ली कि वो अब खुदकी मेहनत से अच्छे से अंक लायेगा ,सुनील ने दिन-रात मेहनत की और अगली परीक्षा में वो अच्छे अंक के साथ पास हुआ ,फिर वो रमन के पास गया और उसने खुद की वाहवाई की,फिर रमन ने उसे से समझाया कि अगर वो उसकी मदद पहले कर देता तो सुनील रमन के ही भरोसे रह जाता और आज सुनील आपने आप इतने अच्छे अंक कैसे लाता।

यह बात सुनके सुनील को अपनी गलती का एहसास हुआ और उसने रमन से माफ़ी भी मांगी ,और फिर दोनों में सच्ची मित्रता हो गयी।

Hindi Stories for Kids Moral (सीख ) :– सच्चा मित्र वही है जो अपने मित्र को मदद करे और सही राह दिखाए ,न की उसका गलत काम में साथ दे।

Hindi Stories for Kids New Words (नए शब्द):– 1. ठान लेना — पक्का इरादा करना ( To Make Resolve) 2. वाहवाई करना — तारीफ करना (To Praise)।

3 . छोटी मदद ( Little Help)

एक राज्य में महेंद्र नाम के राजा का शासन (Rule) हुआ करता था ,राजा महेंद्र बहुत शक्तिशाली एवं धनवान (Rich) राजा थे, कहा जाता था की उनके पास इतना धन था कि पूरे राज्य के हर नागरिक (Citizen) का उम्रभर का पालन पोषण कर सकते थे , इस बात के कारण उनके शत्रु (Enemy) उनसे जला करते थे।

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राजा महेंद्र का मानना था कि वे इस राज्य में किसी की भी मदद कर सकते थे और उन्हें किसी की मदद की जरुरत नहीं थी ।

एक बार की बात है , राजा ने अचानक से जंगल में शिकार की योजना (Plan) बनाई ,जब राजा जंगल में पहुंचे अचानक से शत्रुओं ने हमला कर दिया ,राजा जैसे तैसे अपनी जान बचा के भगा , राजा घायल हो चूका था ,प्यास और भूख से परेशान था ,जंगल में चलते -चलते उसे एक झोपडी (Hut) दिखायी दी।

उस झोपडी में श्यामदास नाम का एक बुजुर्ग (Old Person) रहता था ,राजा को घायल देख श्यामदास राजा को अपनी झोपडी में ले गया और वहां उसका उपचार (Treatment) किया ,उनको खाना दिया और जब तक उसकी सेना आ नहीं गयी राजा अपनी झोपडी में आराम करने दिया।

कुछ समय बाद राजा अपने राज्य लौट गए ,एक दिन उन्हें इन बुजुर्ग की याद आयी ,उन्होंने उनको बुलवाया ,और उनसे कहा की ,” श्यामदास जी अपने मेरी जो जान बचायी थी ,मैं उसका एहसान चुकाना चाहता हु ,मांगिये! , दुनिया में आपको जो चाहिए वो मिलेगा “.

श्यामदास का उत्तर …

श्यामदास ने कहा ” महाराज आप मेरी मदद का एहसान कैसे उतरेंगे ,मैने तो एक आम इंसान होके भी एक राजा की मदद की थी ,पर आप तो एक राजा है और आप अपने से छोटे से इंसान की मदद आसानी से कर सकते है ,आपकी मदद और मेरा एहसान बराबर कैसे हुआ ?….

राजा को अपनी गलती का एहसास हुआ कि वो उस बुजुर्ग की मदद का अपमान कर रहा है ,राजा ने माफ़ी मांगी और आगे से कभी भी अपने धनवान होने का घमंड न करने की कसम खायी।

Hindi Stories for Kids Moral (सीख ) :— जरुरी नहीं है की हमे किसी की मदद करने के लिए राजा जितना धनवान होना पड़े हम कभी भी किसी मदद कर सकते हैं।

Hindi Stories for Kids New Words (नए शब्द) :— 1.पालन पोषण करना :– देखभाल करना (Upbringing)

 

4 . बात मान लेनी चाहिए

एक बार की बात है एक शहर में चिंटू नाम का एक बच्चा रहता था ,वो 8th क्लास में पड़ता था ,चिंटू बड़ा ही शैतान बच्चा था ,उसके माता पिता जो भी उसको समझाते वो बस ये कहता “मैं अब बड़ा हो चुका हूँ , मैं अपना ध्यान खुद रख सकता हूँ”।

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                                                                                           parents and kids

चिंटू की एक आदत बड़ी परेशान करने वाली थी ,वो अनजान (Stranger) लोगो से जल्दी घुल मिल जाता था ,उसके माता पिता जानते थे ,ये बात सही नहीं है , पर वो करते भी क्या ,चिंटू उनकी बात सुनता ही नहीं था।

एक बार की बात है इस आदत पर एक चोर का ध्यान चला गया ,एक बार जब चिंटू ,स्कूल से जा रहा था ,तभी वो चोर चिंटू के पास आया और बड़े प्यार से बोला ,” अरे ! राहुल कहा जा रहे हो?”, चिंटू बोला “मेरा नाम राहुल नहीं चिंटू है”|

फिर चोर ने कहा ” अरे तुम वही हो न जो सुरेश कॉलोनी में रहते हो ?”,” जी नहीं मैं तो रमेश कॉलोनी ,फ्लैट 2 में रहता हूँ”, चिंटू ने कहा ,

फिर चोर ने बहाना बनाया ” अरे नहीं तुम राहुल ही हो ,तुम्हारे हाथ पर तिल का निशान है ” ,” चिंटू ने फिर कहा ” अरे नहीं भाई मेरे तो पैर पर निशान है “

चोर ने फिर पुछा ” क्या तुम्हारे पिता का नाम संतोष और माता का नाम मीना नहीं है ?, और क्या तुम्हारे पिता और माता टीचर नहीं है ?”

चिंटू ने तंग आके चिल्ला के कहा ” अरे भाई बोला न, नहीं मेरे पिता का नाम राजू है और माता का नाम रीमा है ,मेरे पिता का शोरूम है वो दिन भर उधर रहते है और माता घर पर रहती है अकेली “

चोर ने सारी जानकारी ले ली थी उसका काम हो गया था ,फिर उसने चिंटू को सॉरी कहा और वो वहा से निकल गया। Hindi Stories for Kids

फिर एक दिन वो चिंटू के घर गया और उसकी माँ अकेली थी ,वहां जाके उनकी माँ को यकीन दिला दिया कि वो चिंटू को अच्छे से जनता है ,और उसकी माँ से कहा ” आंटीजी ,मुझे अभी अपनी फीस के लिए पैसो की जरुरत है ,प्लीज मुझे दे दीजिये में ,चिंटू को कल लौटा दूंगा।

जैसे तैसे उसने पैसे ले लिए और वहां से निकल आया ,बाद में जब चिंटू स्कूल से आया तब पता चला की वो चोर था , तब जाके चिंटू को अपनी गलती का एहसास हुआ। फिर चिंटू ने कसम खायी की वो सदा अपने माता पिता की बात मानेगा।

Hindi Stories for Kids Moral (सीख ) :— कभी भी किसी अनजान को अपनी जानकारी नहीं देनी चाहिए और माता पिता जो सीखते है वो सीखना चाहिए।

 

Hindi Stories for Kids New Words (नए शब्द) :— 1 . घुलना-मिलना — किसी के साथ जल्दी मिल जाना (SOCIALIZE)

 

5. कबूतर और चीटी की कहानी Ant and The Dove Story in Hindi

Short Story In Hindi With Moral
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कबूतर और चीटी की कहानी Ant and The Dove Story in Hindi.

नदी के किनारे एक बहुत ही अच्छा फल का पेड़ था। उस पेड़ पर एक कबूतर बैठा हुआ था और वह बड़े मजे से फल खा रहा था। ऐसे में उसने देखा कि एक हवा का झोंका आया और उस हवे के झोंके में एक चींटी उस नदी में जा गिरा। चींटी के नदी में गिरते ही चींटी ने आवाज लगाई, “मुझे बचाओ कोई तो मेरी मदद करो”

पेड़ पर बैठे कबूतर ने चीटी की आवाज सुनी। अब ऐसे में कबूतर ने तुरंत ही फल छोड़ा और चीटी की मदद को आगे आया। उसने एक पत्ते को ले कर चीटी की और दिया। उस पत्ती की मदद से चींटी ने अपनी जान बचाई। चीटी ने कबूतर को शुक्रिया कहा।

कुछ दिनों बाद जंगल में एक शिकारी आया उस शिकारी ने जंगल में जाल बिछाया और जाल बिछाने के बाद उसमें कुछ खाने के दाने डाल दिए। यह सारी घटना चींटी देख रहा था।

कुछ देर बाद वह कबूतर खाने के लिए नीचे की ओर आ रहा था, कि कभी चीटी ने सोचा कि मुझे उसकी मदद करनी चाहिए।

तो फिर उस चीज में जाकर छुपे हुए शिकारी के पैर को ज़ोर से काटा जिससे शिकारी की चीख निकल गई। शिकारी की उस चीज को सुनकर कबूतर चौकन्ना हो गया और इस जाल में फंसने से बच गया।

इस तरह से चींटी ने उस कबूतर की जान बचाई

Moral of The Ant and The Dove Story in Hindi

जो जैसा करता है उसे वैसा ही फल मिलता है। कहानी में पहले चींटी मुसीबत में था तो कबूतर ने उसकी जान बचाई उसी तरह से चींटी ने भी कबूतर की जान बचाई। इसीलिए हमें भी दूसरों की मदद करनी चाहिए और किसी भी मुसीबत में पड़े हुए इंसान को सहायता देकर उसे मुसीबत से बाहर निकालना चाहिए। कबूतर और चीटी की कहानी Ant and The Dove Story in Hindi.

 

6. लोमड़ी और मुर्गा की कहानी Story of Fox and Rooster in Hindi

लोमड़ी और मुर्गा की कहानी Story of Fox and Rooster in Hindi.

एक छोटे से गांव में एक मुर्गा रहता था। मुर्गा बहुत ही समझदार और चलाक था। एक दिन गांव में एक लोमड़ी आया। लोमड़ी ने देखा की एक मुर्गा पेड़ की टहनी पर बैठा हुआ था। मुर्गे को देखकर लोमड़ी ने विचार किया कि वह मुर्गे को खा जाएगा लेकिन उसके लिए उसे मुर्गे को नीचे बुलाना पड़ेगा।

अब लोमड़ी ने विचार किया कि वह मुर्गे को बेवकूफ बनाएगा और उसे नीचे लेकर आएगा यह सोचकर उसने मुर्गे से कहा, “तुम वहां ऊपर क्या कर रहे हो नीचे आओ नीचे आकर हम दोनों बैठ कर एक साथ बात कर सकते हैं।” ऐसा कह कर लोमड़ी मुर्गे को बेवकूफ बनाना चाहता था।

मुर्गे ने कहा, “नहीं मैं नीचे नहीं आ सकता क्योंकि मैं खूंखार जानवरों से दूर रहता हूं। इसलिए मैं वहां तुम्हारे पास नीचे नहीं आ सकता। मुझे इस बात का डर है कि तुम मुझे दबोच कर खा जाओगे।”

“अरे! तुम्हें नहीं पता,” लोमड़ी ने कहा, “आज जंगल में सभी जानवरों ने फैसला किया है कि वह एक दूसरे जानवरों के साथ मिलकर रहेंगे और एक दूसरे का शिकार नहीं करेंगे। इसलिए अब तुम्हें किसी से डरने की जरूरत नहीं है। मुझसे भी डरने की कोई आवश्यकता नहीं है। नीचे आ जाओ हम बैठ कर बात कर सकते हैं।”

मुर्गा लोमड़ी की बातों को सुन रहा था और वह जानता था कि लोमड़ी उसे बेवकूफ बनाने की कोशिश कर रहा है। तो इसी वजह से मुर्गे ने में अपना दिमाग लगाया और उसने लोमड़ी से कहा, “अरे वाह यह तो अच्छी बात है! अगर ऐसा ही है तो हम सब मिलकर एक साथ रह सकते हैं। ऐसा कहने के बाद मुर्गा अपनी गर्दन को ऊपर करके दूर की तरफ देखने लगा।”

मुर्गी को ऐसा करता है देख लोमड़ी सोचने लगा कि आखिर मुर्गा क्या रहा है? इस वजह से उसने मुर्गे से पूछा कि आखिर तुम वहां क्या देख रहे हो? क्या है वहाँ?

लोमड़ी ने मुर्गे से कहा, “दरअसल बात यह है कि यह खबर अभी तक जंगली कुत्तों तक नहीं पहुंची है। इसीलिए मुझे यहां से भाग कर जाना पड़ेगा। “

यह कहकर लोमड़ी तुरंत ही वहां से भाग गया और इस तरह से मुर्गे ने अपनी जान बचाई और अपनी रक्षा की।

Moral of Fox and Rooster Story in Hindi

इस कहानी से हमें यह सीख मिलती है कि हमें दूसरों की बात को तुरंत नहीं मानना चाहिए हमें उस पर विचार जरूर करना चाहिए कि वह हमारे लिए सही है या नहीं। इस कहानी से हमें यह भी शिक्षा मिलते हैं कि हमें अपनी रक्षा के लिए हमेशा विचार करना चाहिए।

 

7 .साँप और चीटी की कहानी Moral story of snakes and ants in Hindi

जंगल में तरह-तरह के जानवर रहा करते है। कुछ जानवर पेड़-पौधे खाते है और कुछ अन्य जानवरों को खाते है। एक जंगल में एक छोटा सा सांप अपने बिल में रहता था। वह चूहों, बतक आदि छोटे-छोटे जानवरों को खता था। उसका डर बस छोटे जानवरों तक सिमित था। धीरे धीरे वह बड़ा होने लगा। अब शरीर बड़ा होने के साथ-साथ उसे ज़्यादा खाना खाने की आवश्यकता थी। ऐसे में वह एक दिन में बहुत सरे छोटे जानवरों को खा जाता। वह सांप चिडियो को, चिड़ियों के अण्डों को, चूहे, खरगोश,बतख आदि अन्य जानवरों को खाया करता। खाने के बाद अपने बिल में घुस जाता और सोता रहता। जंगल के सारे जानवर उससे परेशां रहने लगे थे।

धिरे-धीरे समय निकलता गया और सांप का शरीर और भी बड़ा होता चला गया। अब उसे अपने बिल में घुसने में मुश्किल होती थी। कभी-कही तो वह अपने बिल में फस जाया करता था। ऐसे में वह सांप दूसरे बिल की तालाश में इधर-उधर भटकने लगा। रेंगता हुआ वह एक बरगद के पेड़ के पास जा पंहुचा। उसने वह देखा की वह चीटियों ने बहुत ही बड़ा बिल बनाया था। सांप ने सोचा, “यह बिल मेरे लिए बहुत सही रहेगा। यह बड़ा भी है और मेरे शरीर के लिया उत्तम भी है। ” यह सोचकर वह चीटिंयों के पास गया और उनसे बोला, “आज से मई इस बिल में रहूँगा तुम सब यहाँ से चले जाओ।”

बरगद का पेड़ बहुत ही बड़ा होता है जिसमे एक साथ बहुत से जानवर रह सकते है। इसीलिए उस बरगद के पेड़ में भी बहुत से जानवर पंछी रखा करते। लेकिन जब उन्होंने सुना की वह सांप यहाँ रहना कहता है तो वे सब डर गए। सबने सोचा के कैसे भी यह सांप यहाँ से चला जाए।

चीटियों ने जैसे ही सांप की बात सुनी तो वे गुस्सा हो गई और सबसे मिलकर एक साथ सांप पर हमला कर दिया। चीटियों ने सां के शरीर को पूरा ढक लिया और वे सुब सांप को काटने लगी। ऐसे में सांप छटपटाने लगा और तुरंत वहां से भाग गया। इस तरह से छोटी सी दिखने वाली चींटियों ने एक बड़े से सांप को भगा दिया। इसलिए कहते है न जो जैसा दीखता है वैसा होता नहीं। दूसरे के छोटे शरीर को देख यह नहीं सोच लेना चाहिए की वह करजोर है। एक छोटा सा चींटी एक बड़े से हाथी को आसानी से परेशान कर सकती है।

8. शेर और लोमड़ी की कहानी Moral the story of the lion and the fox in Hindi

एक जंगल में एक खूंखार शेर रहता था। वह शेर बहुत ही खतरनाक था जिससे जंगल के सारे जानवर डरा करते थे। शेर अपनी भूक मिटने के लिए जंगल के जानवरों का शिकार करता और उन्हें खा जाता। शेर को ज़ोरों की भूक लगी थी। वह शिकार करने के लिए जंगल में घूमने लगा।
वह बहुत देर तक जंगल में घूमता रहा लेकिन उसे एक भी जानवर दिखाई नहीं दिया। वह भूख के मारे पागल हो रहा था।

बहुत देर तक चलने के बाद शेर एक गुफा के पास जा पंहुचा। गुफा के पास पहुंचते ही उसने सोचा, “यहाँ पक्का कोई जानवर रहता है। मैं उसका शिकार करूँगा और उसे खा जाऊंगा। ” शेर धीरे-धीरे गुफा के अंदर गया। गुफा के अंदर जाकर उसने देखा की वहां कोई नहीं था। वह गुफा खली था। लेकिन शेर को वहां दूसरे जानवर की ताज़ा महक आ रही थी जिससे वह समझ गया की यहाँ पक्का एक जानवर रहता है। ऐसे में शेर वहां छुपकर अपने शिकार का इंतज़ार करने लगा।

कुछ देर बाद एक लोमड़ी वहां आई। लोमड़ी जब अपने गुफा के नज़दीक पहुंची तो उसने देखा की गुफा के अंदर की और शेर के पैरों के निशान है। ऐसे में लोमड़ी बहुत डर गई और वह सोचने लगी की अंदर जाऊ या नहीं जाऊ? लोमड़ी ने खुदको शांत किया और अपने दिमाग का इस्तेमाल करने लगी। बारीकी से देखने के बाद पता चला की शेर के पैरों के निशान अंदर की ओरे जा रहे है लेकिन वापस नहीं आ रहे। ऐसे में लोमड़ी समझ गई की शेर अंदर है।

लोमड़ी अपने निर्णय की पुष्टि करने के लिए एक और तरकीब सोचने लगी। लोमड़ी बोली, मेरी गुफा मैं आ गई। क्या तुम मेरा स्वागत नहीं करोगी ?” लोमड़ी के ऐसे कहने पर शेर चुपचाप अंदर सुन रहा था।

लोमड़ी ने फिर आवाज़ लगाया, “मेरी प्यारी गुफा क्या कोई परेशानी है? आज तुम मेरा स्वागत नहीं कर रही।” यह सुनकर शेर सोचा की उसे चुप नहीं बैठना चाहिए नहीं तो लोमड़ी भाग जाएगी। शेर ने कहा, “नहीं नहीं! सबकुछ ठीक है। तुम्हारा स्वागत है अंदर आओ। ” अब लोमड़ी पाके तौर पर जान चुकी थी की शेर अंदर ही है। ऐसे में वह जितनी जल्दी हो सके वहां से भाग गई और अपनी जान बचा ली। दूसरी तरफ शेर वही भूखा अंदर इंतज़ार करते-करते मर गया।

मोरल ऑफ़ द स्टोरी : हमें हमेशा धंदे दिमाग से काम करना चाहिए। अगर हम किसी मुसीबत में हो तो सबसे पहले हमें अपना दिमाग शांत करना चाहिए फिर कोई निर्णय लेना चाहिए इससे गलतियाँ होने की सम्भावना कम हो जाती है।

 

9.अंगूर खट्टे है Moral story of grapes are sour in Hindi

एक भूखी लोमड़ी खाने की तलाश में इधर-उधर भटक रही थी। भटकते-भटकते उसे वह एक ऐसी जगह जा पहुंची जहाँ उसके सामने बहुत सारा अंगूर पेड़ की उचाईयों में लगा था। अंगूर को देखकर उसके मुँह में पानी आ गया। लोमड़ी सोचने लगी, “वह कितने स्वादिस्ट अंगूर है इन्हे खाकर मज़ा आ जाएगा। मई पूरा अंगूर खा जाउंगी।”

यह सोचने के बाद वह छलांग लगाती है ताकि वह कूदकर अंगूर को खा सके। लेकिन अंगूर ऊपर था। लोमड़ी ने फिर छलांग लगाया लेकिन फिर भी वह उस अंगूर तुक नहीं पहुंच सकी। ऐसे में वह और ज़ोर से छलांग लगाने लगी। लोमड़ी ने सारा ज़ोर लगा दिया लेकिन फिर भी वह अंगूर तुक नहीं पहुंच सकी। बार-बार कोशिश करने बावजूब भी वह अंगूर तुक नहीं पहुंच सकी। अंत में हार मानकर वह वह से जाने लगी। जाते-जाते उसने कहा, “अंगूर खट्टे है।”

इस कहानी के माध्यम से हमें यह बताया जा रहा है की जब हम किसी चीज़ को पसंद करते है तो उसे पाने के लिए तरह-तरह के कोशिश करते है। लेकिन जब हम उसे प्राप्त नहीं कर पाते तो उसकी बुराई करने लगते है। पहले लोमड़ी अंगूर को स्वादिस्ट कहती है। लेकिन जब वह उसे हासिल नहीं कर पाती तो वह अंगूर खट्टे है कहकर वह से चले जाती है।

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10.लोमड़ी और सारस की कहानी Moral story of the fox and the stork in Hindi

बहुत समय पहले जंगल में एक लोमड़ी और सारस रहा करते थे। लोमड़ी बहुत चालाक थी। सारस बहुत समझदार और दूसरों से अच्छा व्यवहार करता था। वह दूसरों के साथ अच्छे से मिलजुल कर रहा करता था। वह कभी किसी को नीचा दिखाने की कोशिश नहीं करता।

एक दिन लोमड़ी सारस को नीचा दिखाने की लिए उसके पास आई और उसे बोली, “कैसे हो मेरे दोस्त।”

“मैं बहुत अच्छा हूं,” सारस ने लोमड़ी से कहा, “तुम बताओ यहां आज कैसे आना हुआ।”

“मैं यहां तुम्हें आमंत्रित करने आई हूं। दरअसल मेरा जन्मदिन है और मैं अपने जन्मदिन के उपलक्ष में एक पार्टी का आयोजन कर रही हूं और मैं अपने जन्मदिन के लिए सबको आमंत्रित कर रही हूं। मैं चाहती हूं कि तुम भी मेरे जन्मदिन के उपलक्ष पर आओ।

“जी हां ठीक है। मैं जरूर आऊंगा।” सारस ने कहा। ऐसा कहकर लोमड़ी वहां से चली गई। फिर सारस अगले दिन का इंतजार करने लगा। जैसे ही दिन की शुरुआत हुई सारस तैयार होने लगा था ताकि वह उसके जन्मदिन के दावत में जा सके। पार्टी का समय आ चुका था अब सारस लोमड़ी के घर पहुंचा लोमड़ी ने सारस का स्वागत किया और उसे भोजन करने को कहा।

लोमड़ी ने चालाकी से सारस को एक प्लेट में खाना दिया। सारस पतली प्लेट में खाना देखकर घबरा गया क्योंकि सारस की चोंच बहुत लंबी थी और वह इस तरह से प्लेट से खाना नहीं खा सकता था। सारस हमेशा आपने पतली सुराही में खाना खाया करता था। ऐसे में सारस समझ चुका था कि लोमड़ी उसका मजाक उड़ाने के लिए और उसे नीचा दिखाने के लिए यहां बुलाई है।

लोमड़ी ने सारस से पुछा, “क्या बात है आज का खाना अच्छा नहीं है क्या? खाओ-खाओ इसे हमने बहुत अच्छे से बनवाया है तुम्हें जरूरत हो तो मैं और लेकर आ सकती हूं।”

“नहीं-नहीं इतना ही काफी है।” ऐसा कहकर सारस चुपके से चला गया।

कुछ दिनों बाद सारस का भी जन्मदिन आया इस अवसर पर वह लोमड़ी को बेवकूफ बनाना चाहता था। उसने भी जाकर लोमड़ी को आमंत्रित किया और उसे कहा, “कल मेरा जन्मदिन है तुम आना।”

“हां मैं जरूर आऊंगी।” लोमड़ी ने कहा। अगले दिन लोमड़ी तैयार होकर सारस के घर पर गया ताकि वह उसका जन्मदिन मना सके। सारस ने उसे खाने के लिए खाना दिया लेकिन सारस ने लोमड़ी को खाना एक पतली सी सुराही में दिया। लोमड़ी प्लेट में खाया करती थी। ऐसा करके सारस उसे बेवकूफ बनाना चाहता था। लोमड़ी समझ चुकी थी कि सारस वैसा ही कर रहा है जैसा उसने उसके साथ किया था।

लोमड़ी समझ चुकी थी कि उसे बेवकूफ बनाया जा रहा है। इसीलिए वह बहाना बनाकर वहां से चली गई।

मोरल ऑफ़ द स्टोरी- इस कहानी से हमें यह सीख मिलती है कि जो भी हो हमें अपने मेहमान का ख्याल अच्छे से रखना चाहिए और दूसरों को नीचा नहीं दिखाना चाहिए।

दो मटकों की कहानी Moral story of two pots in Hindi

एक छोटे से गांव में एक कुम्हार रहता था। वह दिन भर मेहनत करके मिट्टी के बर्तन बनाता। बर्तन बनाने के लिए उसे पानी की जरूरत पड़ती और वह पानी लाने के लिए पास के तालाब में जाया करता। उस तालाब का पानी साफ़ था।

वह पानी लाने के लिए हर दिन अपने दो मटकों को लेकर तालाब की ओर जाता और उसमें पानी भर कर ले आता। उन 2 मटकों में से एक मटके में छोटा सा छेद था। जिसकी वजह से उसका पानी धीरे-धीरे उसमें से निकल जाता। यह देखकर दूसरा मटका उसका मजाक उड़ाता था की उसका पानी गिर जाता है।

इस बात से वह मटका उदास हो गया। मटके को उदास देखकर कुम्हार ने उससे कहा, “तुम उदास मत हो। मैं तुम्हें यहां हर दिन जानबूझकर लाता हूं। मैं जानता हूं कि तुम में छेद है लेकिन फिर भी मैं तुम्हें यहां पानी भरने के लिए लाता हूं। ऐसा इसलिए है क्योंकि जो भी पानी तुम में से निकल कर बह जाता है वह इन पौधों पर गिरता है। इन पौधों को देखो कितनी सुंदर है और इसमें कितने सुंदर-सुंदर फूल आ गए हैं और ऐसा सिर्फ तुम्हारी वजह से हुआ है। इसीलिए अपनी कमियों पर उदास मत हो इसे अपनी ताकत समझो।

मोरल ऑफ द स्टोरी – हमे कभी भी अपनी कमजोरी को लेकर उदास नहीं होना चाहिए। बल्कि हमें अपनी कमजोरी को हमेशा अपनी ताकत मानना चाहिए और उस पर काम करना चाहिए।

11. केले के छिलके Moral story of Banana Peel in Hindi

एक शहर में लल्लू राम नाम का एक आदमी रहता था। वह खाने पीने का शौकीन था। दिन भर में वह बहुत सी चीजें खाया करता। जो कुछ भी वह खाता उसका छिलका या पेपर या पॉलिथीन सबको सड़क में यूं ही फेंक देता। वह इस बात का ध्यान नहीं रखता था कि उसके ऐसा करने से आसपास का इलाका गंदा होता है और छिलकों से कोई भी फिसल कर गिर सकता है।

एक दिन लल्लू राम को ऐसा करता देख एक छोटे बच्चे ने उसे रास्ते में रोका और उससे कहा, “अरे अंकल! आप यह केले के छिलकों को ऐसे क्यों फेंक रहे हैं? सड़क पर इससे कोई फिसल कर गिर जाएगा और और इससे हमारा आसपास का जगह गंदा भी तो होता है। हमे कूड़ा कचरा डस्टबिन में डालना चाहिए। क्या आपके स्कूल में यह सब नहीं सिखाया गया?”

लल्लू राम ने उस बच्चे पर ध्यान नहीं दिया बल्कि उल्टा उसके साथ मजाक कर कहने लगा, “नहीं बच्चे मैं तो कभी स्कूल ही नहीं गया। हा हा हा हा हा हा हा।”

लल्लूराम हंस-हंसकर वहां से चला गया। लेकिन जब वह शाम को अपने घर की ओर वापस लौट रहा था तब वही बच्चा पास में अपने दोस्तों के साथ खेल रहा था। लल्लूराम उस बच्चे को देख रहा था। उसे देखकर लल्लूराम मुस्कुरा रहा था कि तभी अचानक उसका पैर उस केले के छिलके पर पड़ा जिसे उसने सुबह फेका था। केले के छिलके पर पैर पढ़ते ही वह फिसल कर जोर से गिरा। उसको देख आसपास के सारे बच्चे उस पर हंसने लगे।

फिर से वह बच्चा उसके पास वापस आया और उससे कहा, “क्यों अंकल मैंने कहा था ना कि कूड़ा कचरा यहाँ वहाँ नहीं फेंकना चाहिए।”

मोरल ऑफ़ द स्टोरी-हमें कभी भी कूड़ा कचरा बीच सड़क पर नहीं फेंकना चाहिए। उसे हमेशा डस्टबिन में डालना चाहिए। इससे हमारा आसपास का वातावरण साफ रहता है और दूसरों को नुकसान भी नहीं पहुंचता। Short Story In Hindi With Moral.

 

12 स्कूल की दोस्ती – Hindi Moral Story

नरेंद्र बिहार के एक छोटे से गांव के सर्वोदय विद्यालय में पढता था। दरअसल नरेंद्र का परिवार दिल्ली शहर का था, क्यों की नरेंद्र के पिता भारतीय सेना में थे इसलिए दो साल पहले ही उसके पिताजी का उस गांव में बदली हुई थी। नरेंद्र पढ़ाई और खेल में बहुत अच्छा था, इसलिए वह उस गांव के विद्यालय में बहुत लोकप्रिय था।

एक दिन अचानक उसके पिताजी की बदली पटना शहर में हुई। दो महीने के अंदर नरेंद्र के परिवार को वह गांव छोड़कर पटना जाना पढ़ रहा था। दूसरे विद्यालय में वह कैसे जाएगा, उसका मन लगेगा या नहीं यह सोचकर नरेंद्र परेशान था।

उसकी परेशानी को देखकर उसकी की माँ ने उसे समझाया, “बेटा, हमें यह गांव छोड़कर तो जाना ही पड़ेगा। परंतु तुम्हें ज़्यादा निराश होने की जरूरत नहीं, थोड़े ही दिनों में वहां भी तुम्हारे मित्र बन जाएंगे और तुम्हारा मन स्कूल व मित्रों में लगने लगेगा।”

ट्रांसफर का ऑर्डर लेकर जब नरेंद्र के पिता अपने परिवार के साथ पटना पहुँचे तो यह नया शहर नरेंद्र के मन को एकदम भा गया। वहां शीघ्र ही एक अच्छे विद्यालय में नरेंद्र को दाखिला मिल गया। परंतु जब नए विद्यालय में नरेंद्र को उसकी कक्षा के विद्यार्थियों ने चिढ़ाना शुरू किया तो उसे बहुत बुरा लगा। नरेंद्र बहुत दुखी लगने लगा।

एक दिन जब उसकी माँ ने उससे खुलकर इसका कारण पूछा तो फिर नरेंद्र ने माँ से सभी बातें स्पष्ट बता दीं। वह माँ से यह बताते हुए कि कक्षा के विद्यार्थी उसे चिढ़ाते है और उसे अपने साथ नहीं खेलने नहीं देते है।

उसकी माँ ने उसे समझाया, “बेटा विद्यालय तो जाना ही होगा। जब तुम्हें बच्चे चिढ़ाएं तो तुम कुछ मत कहना और न ही मुँह बनाना। बल्कि उनके साथ हँसने लगना। और तुम बच्चों से खुद ही बात करने की कोशिश करना। उन्हें यदि पढ़ाई में कोई दिक्कत होती हो तो उनकी मदद करना। धीरे-धीरे सब ठीक हो जाएगा।”

नरेंद्र माँ की बताई तरकीब के अनुसार चलता गया। अब पुराने विद्यालय की ही तरह नरेंद्र इस विद्यालय में भी प्रसिद्ध होने लगा था। अपनी पढ़ाई और मेहनत के दम पर उसने अध्यापकों के बीच भी अपनी अच्छी पहचान बना ली थी। अब सब बच्चे भी उससे मित्रता करने को आतुर थे।

Moral of the Story – जीवन में कोई सही निर्णय नहीं है, क्योंकि हम जो भी निर्णय लेते हैं वह नया और अप्रत्याशित होता है।

 

 

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