New panchatantra stories in hindi|पंचतंत्र की कहानियां

panchatantra stories in hindi

panchatantra stories in hindi ऐसी संस्कृत कहानियां है जो कि काफी लोकप्रिय है। इस ग्रंथ को लिखा है पं. विष्णु शर्मा ने ,और आज पूरी दुनिया की 50 से ज्यादा भाषओं में इनका अनुवाद किया गया है|

दोस्तों इससे पहले कि आप कहानियां पढ़े , ये जान लेते है panchatantra stories in hindi को लिखा क्यूँ गया ,इसके पीछे भी एक मजेदार कहानी है।

panchatantra stories in hindi

एक समय की बात है ,दक्षिण भारत में एक महिलारोग्य नाम के नगर में अमरशक्ति नाम के राजा का राज था। उनके तीन पुत्र थे उग्रशक्ति ,बहुशक्ति ,अनंतशक्ति। ये तीनों ही बड़े मुर्ख अउ अहंकारी थे।

राजा ने अपने पुत्रों को शिक्षा देने की कोशिश की ,पर नाकाम रहे। फिर तंग आके राजा ने अपने मंत्रियो से राय मांगी ,राजा के एक मंत्री सुमति , जो की बहुत बुद्विमान थे, उन्होंने पंडित विष्णु शर्मा के बारे में राजा को बताया ,उन्होंने कहा ,पंडित विष्णु शर्मा काफी विद्वान हैं।

मंत्रीगण से राय लेने के बाद पंडित विष्णु शर्मा से अनुरोध किया वे उनके पुत्रों को शिक्षा दें ,और राजा ने उपहार के लिए पंडितजी को 100 गांव देने का वचन दिया ,पर पंडितजी ने लेने से इंकार कर दिया ,पर राजकुमारों को शिक्षा देने के कार्य को चुनौती की तरह लिया।

इसके साथ ही उन्होंने कहा कि यह कार्य वो केवल 6 महीनों में पूरा करेंगे और अगर न कर पाए तो वो मृत्युदंड भी लेने को तैयार है। ऐसा सुनते ही राजा निश्चित हो गए।

पंडितजी राजकुमारों को आश्रम ले आये ,फिर पंडितजी ने शिक्षा शुरू की यहाँ उन्होंने ने राजकुमारों को कथाएं सुनाई इन कथाओं में पंडितजी ने पशु पक्षिओ का वर्णन किया ,इन कथाओं में पशु पक्षी के द्वारा शिक्षा दी , बताया की क्या गलत है क्या सही।

राजकुमारों की शिक्षा खत्म हो जाने के बाद। उन्होंने इन् सब कहानियों का संग्रह किया और इन्ही को पंचतंत्र की कहानियों panchatantra stories in hindi के नाम से जाना जाता है|

Complete Panchatantra Stories In Hindi

1 ) गधा रहा गधा ही

Donkey
Donkey

एक जंगल में एक शेर रहता था। गीदड उसका सेवक था। जोडी अच्छी थी। शेरों के समाज में तो उस शेर की कोई इज्जत नहीं थी, क्योंकि वह जवानी में सभी दूसरे शेरों से युद्ध हार चुका था, इसलिए वह अलग-थलग रहता था। उसे गीदड जैसे चमचे की सख्त जरुरत थी जो चौबीस घंटे उसकी चमचागिरी करता रहे। गीदड को बस खाने का जुगाड चाहिए था। पेट भर जाने पर गीदड उस शेर की वीरता के ऐसे गुण गाता कि शेर का सीना फूलकर दुगना चौडा हो जाता।

एक दिन शेर ने एक बिगडैल जंगली सांड का शिकार करने का साहस कर डाला। सांड बहुत शक्तिशाली था। उसने लात मारकर शेर को दूर फेंक दिया, जब वह उठने को हुआ तो सांड ने फां-फां करते हुए शेर को सीगों से एक पेड के साथ रगड दिया।

किसी तरह शेर जान बचाकर भागा। शेर सींगो की मार से काफी जख्मी हो गया था। कई दिन बीते, परन्तु शेर के जख्म थीक होने का नाम नहीं ले रहे थे। ऐसी हालत में वह शिकार नहीं कर सकता था। स्वयं शिकार करना गीदड के बस का नहीं था। दोनों के भूखे मरने की नौबत आ गई। शेर को यह भी भय था कि खाने का जुगाड समाप्त होने के कारण गीदड उसका साथ न छोड जाए।

शेर ने एक दिन उसे सुझाया “देख, जख्मों के कारण मैं दौड नहीं सकता। शिकार कैसे करुं? तु जाकर किसी बेवकूफ-से जानवर को बातों में फंसाकर यहां ला। मैं उस झाडी में छिपा रहूंगा।”

गीदड को भी शेर की बात जंच गई। वह किसी मूर्ख जानवर की तलाश में घूमता-घूमता एक कस्बे के बाहर नदी-घाट पर पहुंचा। वहां उसे एक मरियल-सा गधा घास पर मुंह मारता नजर आया। वह शक्ल से ही बेवकूफ लग रहा था।

गीदड गधे के निकट जाकर बोला “पांय लागूं चाचा। बहुत कमजोर हो अए हो, क्या बात हैं?”panchatantra stories in hindi

गधे ने अपना दुखडा रोया “क्या बताऊं भाई, जिस धोबी का मैं गधा हूं, वह बहुत क्रूर हैं। दिन भर ढुलाई करवाता हैं और चारा कुछ देता नहीं।”

गीदड ने उसे न्यौता दिया “चाचा, मेरे साथ जंगल चलो न, वहां बहुत हरी-हरी घास हैं। खूब चरना तुम्हारी सेहत बन जाएगी।”

गधे ने कान फडफडाए “राम राम। मैं जंगल में कैसे रहूंगा? जंगली जानवर मुझे खा जाएंगे।”

“चाचा, तुम्हें शायद पता नहीं कि जंगल में एक बगुला भगतजी का सत्संग हुआ था। उसके बाद सारे जानवर शाकाहारी बन गए हैं। अब कोई किसी को नहीं खाता।” गीदड बोला और कान के पास मुंह ले जाकर दाना फेंका “चाचू, पास के कस्बे से बेचारी गधी भी अपने धोबी मालिक के अत्याचारों से तंग आकर जंगल में आ गई थी। वहां हरी-हरी घास खाकर वह खूब लहरा गई हैं तुम उसके साथ घर बसा लेना।”

गधे के दिमाग पर हरी-हरी घास और घर बसाने के सुनहरे सपने छाने लगे। वह गीदड के साथ जंगल की ओर चल दिया। जंगल में गीदड गधे को उसी झाडी के पास ले गया, जिसमें शेर छिपा बैठा था।

इससे पहले कि शेर पंजा मारता, गधे को झाडी में शेर की नीली बत्तियों की टरह चमकती आंखे नजर आ गईं। वह डरकर उछला गधा भागा और भागताही गया। शेर बुझे स्वर में गीदड से बोला “भई, इस बार मैं तैयार नहीं था। तुम उसे दोबारा लाओ इस बार गलती नहीं होगी।”panchatantra stories in hindi

गीदड दोबारा उस गधे की तलाश में कस्बे में पहुंचा। उसे देखते ही बोला “चाचा, तुमने तो मेरी नाक कटवा दी। तुम अपनी दुल्हन से डरकर भाग गए?”

“उस झाडी में मुझे दो चमकती आंखे दिखाई दी थी, जैसे शेर की होती हैं। मैं भागता न तो क्या करता?” गधे ने शिकायत की।

गीदड झूठमूठ माथा पीटकर बोला “चाचा ओ चाचा! तुम भी निरे मूर्ख हो। उस झाडी में तुम्हारी दुल्हन थी। जाने कितने जन्मों से वह तुम्हारी राह देख रही थी। तुम्हें देखकर उसकी आंखे चमक उठी तो तुमने उसे शेर समझ लिया?”

गधा बहुत लज्जित हुआ, गीदड की चाल-भरी बातें ही ऐसी थी। गधा फिर उसके साथ चल पडा। जंगल में झाडी के पास पहुंचते ही शेर ने नुकीले पंजो से उसे मार गिराया। इस प्रकार शेर व गीदड का भोजन जुटा।


panchatantra stories in hindi सीखः दूसरों की चिकनी-चुपडी बातों में आने की मूर्खता कभी नहीं करनी चाहिए।

panchatantra stories in hindi New Words:– लज्जित– Ashamed

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